Monday, 21 February 2011

ज़ख्म वह क्या...जिसे वक़्त भर जाये.

ज़ख्म वह क्या... जिसे वक़्त भर जाये,
ज़ख्म वो 
कोशिश करे जिसे  भरने का...हर वह पल
सुर्ख लहू से तर जाये.
उतर जाये जिसका नशा लम्हों के दामन में,
उस बेवफा दर्द से मदहोश दवा की उम्मीद
क्या की जाये...??

जख्म वह क्या...जिसके रहते पलकें सूख जाये,
ज़ख्म वो ....
जिसकी टीस से  लड़ता समय भी घायल हो जाये ,
ज़ख्म वो...
जो साँसों का हिस्सा बन जाये, 
ज़ख्म वो...
खुदा की खुदाई भी जिसे देकर पल-पल पछ्ताए 

ज़ख्म वह क्या...जिसे वक़्त भर जाये.

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